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किस्मत 🖐

​उस जगह से आइना शायद साफ़ नहीं दिखता ;

कुछ यूँ के किस्से किरदारों के ख़त्म ही नहीं हुए ।


वो ताक़त में यकीन रखता होगा शायद ;

ज़ज़्बात इंसानो के कभी पैसो के नहीं हुए ।


लिखता तो वो किस्मत पहले भी था ;

इस कदर यकीन टूटने से पहले ,

हाथ किसी के पीले नहीं हुए ।




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Kuldeep choudhary

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Khaab ©

​तुम बे-हद रहना ;

हदों में तो कुछ यूँ ;

मेरे दुश्मन भी रहते है |


तुम बे-ख़ौफ़ रहना ;

डर के साए में तो कुछ यूँ ;

मेरे सपने भी रहते है |




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Kuldeep choudhary

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Fir hua ↩

​मैं मेरे भगवान् का भी हुआ ;

ऐ मौला मैं तेरा भी हुआ ;

तुम सब मशरूफ किसी और में ;

फिर इलाज उस रोग का ;

मेरे ज़मीर से हुआ !




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Kuldeep choudhary ®

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Compromise #1


( तनीषा की शादी के दो महीने बाद )

Mumbai-pune express way ( check post )
2:50 pm


“सर ! डिग्गी खोलिये और अपना लाइसेंस बताइये…”लाल आँखों वाले उस पतले कांस्टेबल ने अपना हाथ गाडी के बोनट पर मार कर कहा ।

“कुछ नहीं बस शादी में मिले तोहफे है पीछे और कुछ नहीं ; मुम्बई जल्दी पहुँचना है मुझे , फ्लाइट है मेरी ; जाने दीजीये…”विनीत बड़े शांत तरीके से बोला 

“मैडम i card वापरो !! “…पास वाली सीट पर बैठी तनीशा को देख कर कांस्टेबल ने अपनी आँखों के इशारों के साथ मराठी में कहा ।

और

गाडी के पीछे जाकर डिग्गी को हाथ से जोर से बजाने लगा ।

विनीत ने एक सेकंड कुछ सोच कर डिग्गी का लिवर ऊपर कर दिया ।



साहब ! साहब ! लाश “…कांस्टेबल लाश और अपने बड़े साहब की तरफ बारी बारी  देख कर चिल्लाया ।

ये आवाज उस कांस्टेबल की विनीत के चेहरे को सकपका गयी और तनीशा साइड मिरर की तरफ देख कर मुस्कुरायी ।

” लाश ! क्या ??? “…तनीशा अपने चेहरे पर घब्राह्ट के भाव लाकर दरवाजा खोल बाहर निकल गयी ।

तनीशा के चेहरे को बड़े गौर से देख कर जब उस कांस्टेबल ने लाश के चेहरे को देखा ; उसके कदम खुद-ब-खुद पीछे सरक गए और वो गिर पड़ा ।


साहब !!!!!!!!!!!… ज़मीन पर पड़ा वो घिसकता हुआ तनीशा से दूर होने की कोशिश कर रहा था ।

और होश संभाल कर वो अपनी पूरी ताकत लगा कर चिल्लाया ” साहब लड़की ये भूत है ; इसी की लाश यहाँ पीछे डिग्गी में पड़ी है । “

तनीशा के चेहरे की मुस्कराहट ने उस कांस्टेबल को और डरा दिया !


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Be Continued….


Written By

Kuldeep choudhary

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Threshold frequency unmatched ®

तू ख्वाब में ;
मैं नींद में ; चलता रहे ये सिलसिला !

नया इश्क़ है ;
दिन गुजरे ; शामो से ना हो वास्ता !

करता रहू ;
इश्क़ तुझसे ; बीच से गुजरती हवा के लिए ना हो फासला !

तेरी हँसी ;
आंसू तेरे ; दवा मैं होउ ; ना हो और कोई फलसफा !

ना जानु तुझे ;
ना तू मुझे ; इशारो में तय हो हर रास्ता !


I dont want to do this , but i couldn’t resist myself ; i think this is crazy way of saying something to the person whom i am affectionate to .


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Translated by Dr.Hrishikesh Sharma

Written by 

Kuldeep choudhary

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