बेइंतहां…

मैं तेरे ख्वाबो में रहू ; तेरी नींदे खुल जाने के भी बाद ! बिखरने लगू ; तेरी ज़ुल्फ़ों के संग , तेरी रातो से कहने लगू , सुबह ना हो , बस राते हो , इस रात के बाद ! मैं तेरे होठो पर रहू ; तेरे आंसू पोंछ लेने के भी बाद !... Continue Reading →

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आफत 🌘

ऐ खुदा ; आज फिर से लिख दु तो आफत है ; आंसू समेटने आते उसको नहीं ; और लब्ज रुकेंगे मेरे भी नहीं ! आज अगर ना निकला चाँद तो आफत है ; नींद मुझे आती नहीं ; और खवाबो के अलावा वो मिलती कही और नहीं ! माना स्याही बची है कम इश्क़... Continue Reading →

The Last Words 🗳

तेरी यादो से निकला वो आखिरी लब्ज लिख रहा हूं ; बैठा यहाँ , ना जाने कहा वो अधूरा चाँद देख रहा हूं ।           कभी पूरा न होगा ,           किस्सा जो खुदा ने लिखा होगा ;           बस इसी कहानी का... Continue Reading →

चाहत !

दे तू  चन्द  लब्ज मुझे  , तारीफ में तेरी , कुछ कहना चाहता हूं  ! दे तू चन्द सपने मुझे , खातिर तेरी हक़ीक़त बून'ना चाहता हूं ! न बोल होठ से हलके बोल मुझे , जागीर मेरी , तेरी आँखों से , पढ़ना चाहता हूं !  कुदरत से क्या तोंलू ऐ हुस्न तुझे , किस्से... Continue Reading →

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