ऐसी मोहब्बत !

​कोई ऐसे भी निभाता है मोहब्बत ;

तूने सुना नहीं ऐ दोस्त..

चले जाने के बाद मेरे , उसने संवरना छोड़ दिया ।


लोगो को क्या मालूम कहानी ;

हर रात आधे होते उस चाँद की..

सुना मेने कही खातिर , ज़मीं के उसने पूरा होना छोड़ दिया ।


बाते सुनाई जाती हैं ,बंजर रेत के समंदर की ;

कौन जाने , उस सूखे में..

कुछ दरख्तों ने खातिर रेत के जीना सीख लिया ।


रोशन हो जाता है जहाँ शमा सारा ;

पता नहीं तुम्हे , कुछ यू की..

खातिर मोहब्बत के परवाने ने जलना सीख लिया ।


छोड़ कर उसे जाना मुमकिन ना हुआ तो ;

तेवर से वाकिफ है सभी उसके..

खातिर खुशबुओं के कांटो ने गुलाब संग जीना सीख लिया ।


मेरी आदतों में भी बेशुमार था वो ;

देख आज बिन साँसों के जीना सीख लिया ।

वो रहता है , मुझमे , मुझसे भी गहरा , 

देख खातिर उसकी खुद पे पर्दा कर लिया ।



द इनसाइडर ©

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