Yaad wo Fir Aa Gaya !

​हिसाब कितने दिनों का ; इन दिनों में कैसे लिखा गया ;

पढ़ कर तारीखे , नशा कुछ शराब सा मेरी आँखों में आ गया !


दे दो कुछ जाम मेरे हाथों में ;

उतर कर उसकी आँखों में , सुकून को सुकून सा कुछ आ गया !


मैं तारीफे करता रहा उसकी ;

कर के नफरत आज , किस्सा वो पुराना याद आ गया !


देखा एक दिन ; उस दिन ; उसे किसी और के साथ ;

उतर कर रगों से ; मेरा ही खून , मेरी ही आँखों में आ गया !


यूँ पलट कर उसका ; अभी भी देखना मुझे ;

एक किस्सा हीर रांझे का , आज फिर याद आ गया !


क्या करता उस दिन ; जब सामने आ गया वो ;

दिल टूट कर मेरे पैरों में , कुछ शराब सी बोतल सा आ गया !


देर क्या लगती बिखरने में फिर ;

मयखाने का पत्ता कुछ इस तरह फिर याद आ गया !


लिखा तो किसी दिन गया ही नहीं ;

किस्सा वो बेवफाई का , आज फिर याद आ गया !




The Insider ©

Kuldeep choudhary

Kuldeepjat341990.wordpress.com

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