अलविदा ।

खामोश लबो के बीच थरथराते है लब्ज मेरे ;

किस्से अधूरी मोहब्बत के अब मुझसे सुनाये नहीं जाते !

टकराने दो ज़मीन से आसमां से बरसती इन बूंदों को ,

याद है मुझे यादो के जलते अंगारे , आंसुओ से बुझाये नहीं जाते !

झुका कर पलके जा रही है तो जाने दो उसे ,

भीगी हुई पलकों पर काजल सजाये नहीं जाते !

सज गयी है उसके हाथों में मेहँदी , तो रंग लाने दो उसे ,

खुरच कर लकीरो को , फैसले किस्मत के बदले नहीं जाते !

उम्मीदों की चादर भी ले आया दरगाह से मैं फिर ,

भूल गया था , फ़रिश्ते दुआओ में खुदा से मांगे नहीं जाते !

जो टुटा हूँ इस बार जाकर कह दो उसे ;

ले जाये अपनी मोहब्बत के खोटे सिक्के ;

अब ये सिक्के मेरे शहर में चलाए नहीं जाते !

_________________________

Written by

Kuldeep choudhary

The Insider©

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