The MILLIONAIRE {हिंदी} #1


September 27, 09:10 pm

Mughalpura police station ; Lahore

Pakistan


“बता दे जो पूछ रहे है…वरना अंजाम से तो वाकिफ होगा तू”…थानेदार निज़ाम अली ने रसोइये के मुँह को अपने मोटे हाथो से दबा कर गुस्से में पूछा ।

“साहब ! उतना ही जानता हूं मैं भी , जितना आप और ये पूरा मुल्क जानता है उनके बारे में”…भींचे हुए मुँह से रसोइया अटकते हुए बोला ।

“तबियत ठीक करो इसकी , मैं आता हूं कुछ देर में”…निजाम अली ने पास ही खड़े एक दूसरे पुलिस वाले को अपने हाथ का डंडा देकर कहा और फोन कान के लगा कर धीमे से फुसफुसाया …

“काम हुआ या नहीं ???”


———————

 September 27 , 09:10 pm ( same time )

Mughalpura road , Lahore , pakistan

उसी समय , मुगलपुरा की नामचीन बस्ती में , जहा कई करोड़पति लोग रहते थे , के एक बड़े से आलिशान घर में !

(अँधेरा फैला हुआ )

बीच में बने एक बड़े से हॉल में एक के ऊपर एक पड़ी तीन लाशे , और दिवार के सहारे बैठी एक जवान औरत और एक बच्चा , उनके खौफ खाये हुये चेहरे बता रहे थे की उन तीन लोगो को लाश बनते उन्होंने अपनी आँखों से देखा था !

और

सामने सीढियो पर बैठा हुआ एक शख्स जिसका चेहरा साफ नज़र नहीं आ रहा था , खुला हुआ कोट , पेंट से आधा अधूरा बाहर निकला हुआ सफ़ेद , खून से रंगा हुआ कमीज , दाएं हाथ की आस्तीन से निकलकर , rolex की काले रंग की घडी से , हाथ में पकड़ी हुई इज़रायली रिवाल्वर के आगे लगे , लंबे आटोमेटिक silencer से टपकता खून देखकर अंदाजा लगाया जा सकता था की वो सीढियो पर बैठा अकेला शख्स उन तीनों पर भारी पड़ा ।

तभी अंदर बैडरूम से फोन बजने की आवाज आई , वो सीढियो से उठकर बैडरूम की तरफ चलने लगा , और चलते चलते अपने दाए हाथ से बाए हाथ में काले दस्ताने पहन कर उसने वो केसरिया रंग की स्क्रीन में बज रहा satellite फोन उठाया ।

बड़ी तेज और बुलंद , पर किसी अधेड़ उम्र के शख्स की आवाज फोन के उस तरफ से आयी…

“hello millionaire”!

 जवाब में उसने कुछ नहीं कहा ,उसके आँखों की पुतलियां , फोन पर उस अधेड़ उम्र की आदमी की बातों के साथ साथ घूम रही थी ।

चुपचाप उस फोन पर सुनते हुए एकदम उसका ध्यान , बाहर हॉल में बज रहे फोन से टुटा ।

बिजली की तेजी से उसने वो satellite फोन बिस्तर पर फेंककर , अपनी रिवॉल्वर को कसकर पकड़कर वो बिना डरे हॉल की तरफ बढ़ा ।

फोन बजने की आवाज उस लाशो के ढेर से आ रही थी ।

उन लाशो को पैरो से धकेल कर उसने ज़मीन पर पड़े उस मोबाइल को उठा कर उस औरत की तरफ कर दिया, जो शायद उन तीनों में से किसी की जेब से गिरा होगा ।


———————

“काम हुआ या नहीं ???”…निज़ाम की मोटी फुसफुसाती आवाज फोन उठाते ही उसे दूसरी तरफ से आयी ।

“Hello ! बोलो हरामखोरो ??? काम हुआ के नहीं ???”…झल्लाते हुए उसने फिर पूछा ।

“हेल्लो ,,,, हेल्लो ….निज़ाम अली फिर चिल्ला कर बोला ।


“हेल्लो ! सुनिये हम बोल रहे है आपकी बेगम , आप , आप छोड़ दीजिए उसे , आपने , आपने किसे पकड़ा है इनके रसोइये को , वरना ये मार देगा मुझे और आपके बच्चे को , वहशी है पूरा ये”…बात पूरी होने से पहले उस आदमी ने फोन अपने कान के पास लाकर कहा..”वही छोड़ के जा मेरे शेफ़ को , जहा से उठाया था , अगर बीवी के हाथ की बनी बिरयानी खाकर सोना चाहता है तो”…कहकर उसने वो फोन लाशो के ऊपर फेंक दिया !


थानेदार निजाम अली बौखलाया हुआ उस रसोइये के पास पंहुचा और खुद ही रसोइये की रस्सी खोलने लगा जो रसोइये के हाथों और पैरो से एक साथ बंधी थी ।

“अरे वही छोड़ आयो जहा से उठाया था इसे “…रुमाल से सिर का पसीना पोंछते हुए पास खड़े दो पुलिस वालों से निज़ाम अली बोला ।


__________________

Will continues in next part…..

__________________


Written by

Kuldeep choudhary

The Insider©

 


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