Emergency {short Story}

Government medical college , aurangabad

Day#4 regional singing and dancing compitition.

Annual function {harmony}



तांडव करते महादेव ; रंगमंच के किनारे नंदी बना एक छात्र दंडवत प्रणाम किये पिछले 2 मिनट से यूही बैठा हुआ ; दर्शको का प्रोत्शाहित करने वाला शोर ; माहौल में हल्की हल्की महक गांजे की भी थी ; जिसे गंजेड़ी महादेवजी का प्रसाद मानते है ; यकायक शोर बढ़ने लगा ; लाल और नीले रंग की झपझपाती लाइट्स की झपझपाहट बढ़ने लगी ; मानो लग रहा हो सब कुछ आसमां की ऊंचाइयों में जाकर बसने जा रहा हो !

तभी महामार्त्युन्जे मंत्र का जाप करता वो स्पीकर बंद हो जाता है और पसीने से तरबतर आयुष माइक से announce करता है…”अगर किसी के पास (o-) ब्लड ग्रुप है तो प्लीज हॉस्पिटल की इमरजेंसी में आये ; ये urgent है ” !

तभी महादेव जी अपने हाथ से त्रिशूल फेंक कर मंच से दर्शक दीर्घा में कूद कर , ऑडिटोरियम के मुख्य दरवाजे से भागते हुए बहार निकलते है । कुछ सेकण्ड्स रुक पार्किंग की तरफ देख कर महादेवजी फिर इमरजेंसी की तरफ दौड़ने लगते है ।


सिर पर काली और सफ़ेद लंबी , घनी जटाये और उनमें से बाहर झांकता एक चाँद , गले तक लगा नीला लेप , कमर पर शेर की खाल सा चितकबरा कपडा लपेटा हुआ , नंगे पैर , गले में उलझा एक कपडे से बना सांप ।

महादेव ! ; हर कोई बस रुक कर उन्हें ही घूरता हुआ , सोच रहा था कि आखिर हो क्या रहा है ?


इमरजेंसी में पंहुंचते ही महादेव जी भीड़ को पीछे कर आगे पहुंचे तो दो डॉक्टर और कुछ नर्स से घिरे एक बेड पर लेटे उस आदमी को जब महादेव जी ने देखा तो आँखे दंग रह गयी ; महादेव जी के मुंह से धीमे से निकला …” मुस्ताक चाचा ”

तभी एक हाथ महादेव जी के कंधे पर पड़ा ।

“तो अभिषेक तुम्हारा (o-) है “…डॉ.नवीन ने पूछा ।

“जी सर “…अभिषेक ने अपने महादेव जी के कॉस्ट्यूम की तरफ देख कर कहा ।

“अरे कोई बात नहीं , जच रहे हो , रशीद भाई भगवान् खुद ब्लड देने आये है , अब कुछ नई होगा मुस्ताक जी को”…डॉ.नवीन ने पहले मुझसे फिर मुस्ताक चाचा के बेटे से कहा ।

10 मिनट बाद सारे टेस्ट हो जाने के बाद जब अभिषेक का खून लिया जा रहा था , वो बड़े शांत और गंभीर तरीके से बेहोश मुस्ताक चाचा के चोट के निशान घूर भी रहा था और साथ साथ कुछ सोच भी रहा था ।

20 मिनट बाद जब मुस्ताक का बेटा अभिषेक के लिए जूस लेकर आया , अभिषेक अपनी सोच से बाहर निकला ; और देखा की मुस्ताक भाई को होश आ गया , और उसी की आँखों को घूर मुस्कुरा रहे थे ; शायद वे भी पहचान गए थे इस गेट अप में अभिषेक को ।

अभिषेक भी मुस्कुरा दिया और जाने के लिए खड़ा हुआ तो मुस्ताक चाचा ने उंगलियो से पास आने का इशारा किया ।

अभिषेक जैसे इंतज़ार ही कर रहा था इस बुलावे का , मुस्ताक चाचा के सिरहाने बैठ मुस्ताक चाचा से पहले बोल उठा…”ये सब झूठ है कि ये सब महादेव जी का प्रसाद है ; ये सब चरस , गांजा , भांग ; ऐसा कुछ नहीं है और अंदर ही अंदर हम जानते भी है इस बात को ; ये सब बस हम खुद के पिने की इच्छा को और मजबूत करने के लिए कहते है ; आज के बाद आप ना ही ख़रीदेंगे और ना ही बेचेंगे , बेटे ठीक ठाक कमा लेते है क्या जरुरत है चाचा “…धीमे से कहते हुए अभिषेक ने चाचा के सफ़ेद बालो से भरे बूढ़े सिर पर हल्का और प्यारा हाथ फेरा ।

मुस्ताक चाचा भी मुस्कुरा दिए और हामी में सिर हिला दिया ; कैसे टाल सकते थे , आखिर नयी ज़िन्दगी दी थी महादेव जी ने ।

चाचा ने मुस्कुरा कर अपने कांपते हाथो की उंगलियां को पैरो में पड़े लंबे कोट की तरफ कर दिया ।

अभिषेक ने कोट की जेब खंगाल कर उसमें पड़ी एक पुड़िया अपनी कमर पर बंधे उस चितकबरे कपडे में गाँठ लगा कर बाँध दी और फिर मिलने का वादा कर मुस्ताक चाचा से इजाजत ली ।

“उस रात उस डांस कॉम्पिटिशन को अभिषेक महज भले ही हार गया हो ; पर एक नयी ज़िन्दगी जीत कर दी थी उसने मुस्ताक चाचा को “

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                   ॐ हर हर महादेव !

Written by

Kuldeep choudhary

The Insider©

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