बेइंतहां…

मैं तेरे ख्वाबो में रहू ;

तेरी नींदे खुल जाने के भी बाद !

बिखरने लगू ;

तेरी ज़ुल्फ़ों के संग ,

तेरी रातो से कहने लगू ,

सुबह ना हो ,

बस राते हो ,

इस रात के बाद !

मैं तेरे होठो पर रहू ;

तेरे आंसू पोंछ लेने के भी बाद !

उड़ने लगू ;

तेरी नींदों के संग ,

अंधेरो से कहने लगू ,

लबो पे तेरे हँसी हो ,

तेरे मेरे बिछड़ जाने के बाद !

तू दुआओं में रहे मेरी ;

खुद से मेरा यकीन टूट जाने के भी बाद !

चलने लगू ;

तेरी राहो के संग ,

तेरी मंज़िल से कहने लगू ,

छम छम चलती रहो ,

इस हमसफ़र के थक जाने के बाद !

चंद सच्चे ख्वाब बचे है ;

कुछ झूठी हक़ीक़तों के खुल जाने के भी बाद !


______________________


Written by

Kuldeep choudhary

The Insider©

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15 thoughts on “बेइंतहां…

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