The Conversation 🚂

आज हमारी दोस्ती ऐसे रुक गयी है ;

मानो जैसे बिना स्टेशन के कोई रेल रुक गयी है !


अंदर से निकली एक सवारी , 

ना जाने क्या बाहर देख कर अंदर चली गयी ;


बैठी थी कैंटीन में मेरे सामने , 

ना जाने क्यों उसे देख कर मेरी नज़रे झुक गयी !


एक बार फिर पूछा मेने नाराज़गी का कारण ,

 क्यों वो बात उसके होठो पर आके रुक गयी ;


वक़्त सही , बात वही , शख्स वही , 

बस मेरी साँसे भी वही आके रुक गयी !


नहीं बढ़ेगी कभी ये रेल आगे , कह कर वो चली गयी ,

यही देखा होगा उस सवारी ने जो वापस अंदर चली गयी !


शायद ये कहानी अभी यहाँ ख़त्म नहीं ,


है कुछ प्यारे से सपने उस दोस्त को लेकर , 

उनका इस तरह क़त्ल नही !


जीता था जिन साँसों से उन साँसों से अपनी साँसों को अलग करूँगा ,

खेर वो तो जी लेगी , पर कमबख्त मैं उसके बिना कैसे जीऊंगा !

 

अब मैं ना कभी हसूंगा , ना कभी रोऊंगा ,


ना ही जानने दूंगा उसे , की उसके बिना अब मैं कैसे रहूँगा !


खेर ,अब मैंने अपनी दुनिया बदल दी है ,


थी क्रिकेट पहले अब बैडमिंटन कर दी है !


उस सवारी ने  T.T से पूछा ,

 ये ट्रैन बिना स्टेशन के कैसे रोक दी है ;


T.T बोला ,

शायद रेल की किसी दूसरी सवारी ने ज़ंज़ीर खेच दी है !


हड़बड़ाहट में आकर बैठा अपने कम्पार्टमेंट में ,

अपनी सांसो को ढूंढ रहा था …

किसने बनाके खेचा उन्हें ज़ंज़ीर ,

बस उसी को ढूंढ रहा था  !

##################

Written by

Kuldeep Choudhary 

January 23 , 2012

The Insider©

All Rights Reserved

Advertisements

17 thoughts on “The Conversation 🚂

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s