The Last Words – कोख ।

तेरे साथ साँसे लेती थी ;

तेरी रोटी से बाँट कर खाती थी ;

मैं जागती , तू सो जाती थी ;

वो बोले आकर ; बेटी है ,


“थी ज़िन्दा मैं कुछ देर पहले तक तुझमे

देख अब ऐसी क्या गलती , तुझसे या मुझसे हो गयी “


तेरी कोख में ना जाने कितने सपने देखे ;

चूड़ी , कलाईयां , मेहंदी , सब होते देखे !



क्यों तू चुप रही ,

मैं मरती रही ,

वो क़ातिलों के औज़ारों से मुझे ,

माँ , का ये ना जाने कैसा रूप देखती रही ।



” थी ज़िन्दा कुछ देर पहले तक तुझमे ; देख अब ऐसी क्या गलती तुझसे या मुझसे हो गयी “




                                By

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           In the series {the last words}

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