चाहत !

दे तू  चन्द  लब्ज मुझे  ,

तारीफ में तेरी , कुछ कहना चाहता हूं  !


दे तू चन्द सपने मुझे ,

खातिर तेरी हक़ीक़त बून’ना चाहता हूं !


न बोल होठ से हलके बोल मुझे ,

जागीर मेरी , तेरी आँखों से , पढ़ना चाहता हूं ! 


कुदरत से क्या तोंलू ऐ हुस्न तुझे ,

किस्से सारे , बिन हारे , मैं लिखना चाहता हूं !

 

कुछ इस कदर क़ैद कर तू मुझे ,

तनहा जुड़ा होकर भी , तेरे दिल में , धड़कना चाहता हूं !


करीब आकर कुछ इस कदर दीवाना कर मुझे ,

माफिक आशिको के तड़पना चाहता हूं ! 


छोड़ जाए जिस दिन तू मुझे ,

इल्जाम सारे , अपने सिर , लेना चाहता हूं ! 


छू कर ज़िन्दा कर दे मुझे ,

कुछ पल और , इन बाहों में , मरना चाहता हूं !



©Kuldeepjat341990.wordpress.com

UnderSection 2015:c75;9cb ®

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