काश !


काश मैं जान पाता , मैं बस एक लम्हा था उसके लिए ;

जो आया था सदियो का इंतज़ार कर , ठहरने बस एक पल के लिए |


उतरा उस रात उसके ख्वाबो मे , उसके लबो को चूमने के लिए ;

फिर ना जाने क्यों सारी रात बहता रहा ‘ ,उसकी आँखों से ; उसी के लिए |


पाँव समेट ‘ , घुटनो पर सिर रख कर , लगा जैसे बैठी हो मेरी हर तस्वीर मिटाने के लिऐ ;

वो तो उसकी आँखों का पानी था , बाकि मेरी मोहब्बत काफी थी खुद को जलाने के लिऐ |


©kuldeepjat341990.wordpress.com

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