वजह |

बुझे ना पानी से जो आग , लगे वो ऐसी हवा बता दे ;

टूट कर गिरू तो ना मिलू , ऐसी कोई जमीन बता दे |


जो आंऊ तेरे लबो पर हंसी बनकर , ऐसी हर मुमकिन  बात बता दे ;

काजल सा साहिल पर खड़ा , तेरी समन्दर  सी आंखो मे बह जांऊ ;

आऐ जिस तारिख ज्वार ; ऐसी वो रात बता दे |


मैं छू कर तुझको भूल जाउंगा खुद को , तेरी इन तिरछी निगाहो के पत्ते बता दे ;

आऐ जो उसी तरह तु , रोज ख्वाबो मे ,

ना उठू सालो तक , ऐसी कोई दवा बता दे |


सवाल उठाते है लोग अब तेरी मेरी मुलाकातो पर , चांद पर अंधेरा करने की ये कैसी तरकीब तेरी ;

इस काजल की वजह तो बता दे |




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