ख़ातिर उसके !

​मैं चिखू और उसे सुनाई ना दूं ;

मैं खुद को रोकु और उसे कभी बहने ना दूं !


मैं खुशबू बन जाऊं , उसे कभी घुटने ना दूं ;

में पानी बन जाऊं , उसे सुलगने ना दूं !


मैं धुँआ बन जाऊं , मुझसे ज्यादा उसे कभी कुछ देखने ना दूं ;

में बारिश बन जाऊं , बालू रेत पर उसके पैरों को जलने ना दूं !


मैं दुआं बन जाऊं , दर पे किसी , सर उसका झुकने ना दूं ;

मैं मरहम बन जाऊं , कोई घाव उसका नासूर होने ना दूं !


मैं समंदर बन जाऊं , नदियों सा उसे , अकेले चलने ना दूं ;

मैं काजल बन जाऊं , उसकी आँखों को खाली ना रहने दूं !


मैं रात बन जाऊं ; दिन के आसमां सा उसे कभी खाली ना रहने दूं ;

मैं कहानी बन जाऊं , किस्सा ये मोहब्बत का कभी खत्म ही ना होने दूं !


मैं बहाना बन जाऊं उसका , उसे कहीं कभी वक़्त पर ना पहुँचने दूं ;

मैं गुनाहगार बन जाऊं ; उसके सर कभी कोई इल्ज़ाम ना आने दूं !






Kuldeep Choudhary ©

La`Parvaah ©

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चलो वहां से चलते है ➡



जिस कहानी के किरदार आप नही बन सकते ;

चलो वहां से चलते हैं !


जिस तारीख आप वहां नही पहुँच सकते ;

चलो वहां से चलते है !


वक़्त खिलोना है ; कांच का ना समझो तो ;

चलो वहां से चलते है !


कांच की बोतल हो , मगर मखमल इश्क़ ना हो ;

चलो वहां से चलते है !


जुगनू रास्ते ना भटका दे ; डर है खो जाने का ;

चलो वहां से चलते है !


औकात है तुम्हारी तो बाटों आसमां को ;

चलो वहां से चलते हैं !


तस्वीरों से आंसू बहते है ; गौर से ना देखो गहराई को ;

चलो वहां से चलते है !


भूल कर लिखो तो माने ; जाले यादो के साफ करेंगे :

चलो वहां से चलते है !


दुआओ में रहते है वो लोग ; हम किस्मत में भी नही ;

चलो वहां से चलते है !

वक़्त ना देने का , इल्ज़ाम धोखा है यहां ;

चलो वहां से चलते है !


इश्क़ अंधा होता होगा , इज्जत का भूखा नही ;

चलो वहां से चलते हैं !


सपनो में उड़ने से नही ; गिर के मरते है यहां लोग ;

चलो वहां से चलते है !


दोस्तो के काम आये ; तरीके अलग है हमारे ;

चलो वहां से चलते है !


रुक कर समझना मेरी लिखी इन बातों को ;

समझो तो बतलाना , साथ चलते हैं !




La`parvaah ©

Kuldeep Choudhary 

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The Missing Bunker  { A short story }

​दिसम्बर 22 , 1943 


जापान में परमाणु हमले से करीब दो साल पहले , जर्मनी के दक्षिण शहर म्युनिक में ।


कुछ अमेरिकी टुकड़ीया म्युनिक शहर को अपने कब्जे में ले चुकी थी।


पर वो दिन , अमेरिका की एक टुकड़ी , जो अपने दो गुमशुदा सैनिको की खोज में हमेशा की तरह निकली थी , के लिए सबसे मशक्कत , और बेबसी भरा दिन था ।


दिन में करीब , 1 बजे , पेट्रोलिंग के दौरान , उन्हें अपने मोटे आर्मी बूट्स की टप टप के अलावा एक अलग आवाज सुनाई दी , ठीक अपने पैरो के आस पास , जो काफी तेज नहीं थी , ऐसा लग रहा था जैसे , हल्की और दबी आवाज में कोई गाने सुन रहा हो ।


म्युनिक शहर के , उस चीखते सन्नाटे में , ये हल्का सा शोर , उस पूरी पेट्रोलिंग टीम का ध्यान अपनी तरफ खेंचने के लिए काफी था ।


और पेट्रोलिंग कमांडर डेनियल रुट को ये समझने में जरा सी भी देर नहीं लगी , की उनके पैरों के ठीक नीचे बने एक बंकर में , कुछ जर्मन सैनिक , स्कॉटलैंड व्हिस्की , के साथ  ,ओपेरा सुनकर दावत उड़ा रहे है ।


शायद उन जर्मन सैनिको को पता ही ना हो की उनका ये म्युनिक शहर अमेरिकीयो के कब्जे में है , वरना अपने दुश्मन को इस तरह से संगीत की आवाज से कौन न्योता देगा , डेनियल रुट शायद उस जमीन की तरफ देख कर यही सोच रहे थे ।


ज़मी पर जमी कुछ मिलीमीटर बर्फ को जब , कमांडर के कहने पर सैनिको ने हटाया ,तो आँखे निकल कर बाहर आ गयी ।

एल्युमीनियम से बना एक मोटा दरवाजा , जो सरक सकता था , अंदर और बाहर जाने के लिए , कुछ सफ़ेद कागजो से ढका हुआ था ।


उस एल्युमीनियम के दरवाजों को सरकाते वक़्त तो ख़ुशी बहुत हुई होगी कमांडर को , आखिर जर्मन सैनिको को पकड़ने के इतने करीब जो थे ।


पर जब वो एल्युमीनियम से बना दरवाजा सरक कर एक तरफ आया , अंदर करीब बीस सीढ़ियों के बाद एक बेहद मजबूत लोहे और कुछ धातुओं से बना अजीब सा मोटा एक और दरवाजा था , जो शायद बंकर के अंदर की तरफ से ही खुलता था ।


कमांडर को ज़रा भी फर्क नहीं पड़ा , उसने मुस्कुरा कर अपनी टुकड़ी से तीन सैनिको को अपने पास बुलाया और इशारो में कुछ कहा , तभी उन तीन सैनिको के अलावा सभी दस कदम पीछे जाकर खड़े हो गए ।


उन तीन सैनिको ने एक एक करके तीन विस्फोटक प्लेट्स , जो जमीनी सुरंगों में इस्तेमाल होने वाला खतरनाक विस्फोटक है , बीस सीढिया उत्तर कर , उस मोटे से दरवाजे के पास लगाकर बाहर निकल आये , जिनमे से एक सैनिक के पास तीन पतली और लंबी रस्सियां थी ।


और वे तीन सैनिक भी दस कदम पीछे चल अपने साथियो के साथ खड़े हो गए और वे रस्सियां जो उस सुरंग से निकल कर आ रही थी , कमांडर को पकड़ा दी ।


कुछ सेकण्ड्स बाद कमांडर ने कुछ बड़बड़ा कर वे तीनों रस्सियां एक साथ खेंच दी , और जो विस्फोट हुआ , वो इतना खतरनाक था , की टुकड़ी के पैरों के नीचे की ज़मीन थर्रा गयी , और पास ही खड़ी एक बहुमंज़िला ईमारत के कांच किसी पतझड़ की तरह ज़मीन पर आ गिरे ।

सीढियो की ओर से उठते उस धुंए की तरफ सैनिक अपनी राइफल और कमांडर अपनी पिस्टल लिए इस तरह खड़े थे जैसे वे जर्मन सैनिक बाहर आने को है ।


कुछ देर बाद जब धुंआ छंटा , तो सभी धीरे धीरे उस बंकर की तरफ़ बढे , और जब अंदर देखा , रति भर भी वो दरवाजा , इधर से उधर नहीं हुआ ।


ये देख कमांडर चिल्लाया , और तभी अंदर से आती उस ओपेरा की आवाज और तेज़ हो गयी ।


अब ये तो तय था , बंकर के अंदर बैठे उन जर्मन सैनिको को ये तो पता था , की अमेरिकी सैनिक उन्हें घेर के खड़े है , और शायद वे ये भी जानते थे , की उनका म्युनिक शहर अमेरिकीयो के कब्जे में है , शायद तभी वे उस ओपेरा को तेज बजा कर उन अमेरिकी सैनिको के शक्ति प्रदर्शन का मजाक उड़ा रहे थे ।


कमांडर डेनियल रुट का सारा फितूर उत्तर गया , उनके बेड़े का सबसे खतरनाक विस्फोटक वो आजमा चुके थे वो भी एक नहीं , तीन एक साथ ।


झल्ला कर कमांडर उन सीढियो में सबसे आखिरी सीढी तक गया और उस मोटे से दरवाजे के आगे जाकर चिल्लाया , तीन दिन बाद क्रिसमस पर वो फिर विस्फोट करेगा , उस दिन  तुम्हे जीसस भी नहीं बचा पाएंगे ।


तीन दिन बाद जब वैसा ही विस्फोट वापस किया गया , दरवाजा वही फौलाद की तरह खड़ा रहा , आखिर हार कर , उसने सुरंग खोदने वाली भारी भरकम अमेरिकी ड्रिलिंग मशीन मंगवा ली जो उत्तरी जर्मनी में थी , जिसे सड़क द्वारा म्युनिक तक पहुचने में बीस दिन लगने थे ।


बीसवें दिन तक , जब तक वो ड्रिलिंग मशीन नहीं आ गयी , वे जर्मन सैनिक वही ओपेरा सुनते और अमेरिकीयो को चिढ़ाते ।

उस दिन जब ड्रिलिंग मशीन ने उस बंकर में एक बड़ा छेद किया , कमांडर ने आर्डर दिया बंकर में छेद से कुछ हथगोले फेंके जाए ताकि उन जर्मन सैनिको की ज़िंदा बचने और वापसी गोलाबारी की उम्मीद ख़त्म हो जाये ।


और जब कमांडर और कुछ सैनिक अंदर घुसे तो देखा , एक ट्रांजिस्टर , एक बैटरी से प्लग इन है , और उन हथगोलों के विस्फोट के बाद भी बज रहा है , कमांडर की नज़र दूसरे कोने में पड़ी तो , उसके होश उड़ गए , दो अमेरिकी सैनिक एक ही रस्सी से बंधे थे , मृत और नग्न ।


और उनके किनारे से निकलती एक सुरंग , जो उन जर्मन सैनिको ने अपने निकलने के लिए खोदी थी , में कमांडर ने अपने एक सैनिक को घुसाया , देखने के लिए की आखिर ये सुरंग निकलती कहा है , तो जब वो अमेरिकी सैनिक सुरंग के दूसरे छोर पर निकला तो ये वही जगह थी जहाँ , विस्फोठ के वक्त दस कदम दूर अमेरिकी सैनिक खड़े होते थे ।


क्रिसमस के दिन जब उस कमांडर ने विस्फ़ोट किया तब उसने शायद अपने सैनिक ठीक से , नहीं , गिने ही नहीं , वे 49 नहीं , 51 थे ।


हां ! उन दो जर्मन सैनिको के साथ , जिन्होंने उन दो गुमशुदा अमेरिकी सैनिको की यूनिफार्म पहन रखी थी ।


बंकर में जर्मन झंडे के साथ एक कागज पर डच भाषा में लिखा था….


” ik had constipatie van sommige laatste days..thanks commandant, uw Blast geeft mij dus reliëf … tot slot ik heb een aantal kak … bedankt voor niet het tellen van “


English translation-


” I had constipation from some last days..thanks commander , your blast gives me so relief…finally I did some poop…thanks for not counting “



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Written by

Kuldeep choudhary

The insider ©

ऐसी मोहब्बत !

​कोई ऐसे भी निभाता है मोहब्बत ;

तूने सुना नहीं ऐ दोस्त..

चले जाने के बाद मेरे , उसने संवरना छोड़ दिया ।


लोगो को क्या मालूम कहानी ;

हर रात आधे होते उस चाँद की..

सुना मेने कही खातिर , ज़मीं के उसने पूरा होना छोड़ दिया ।


बाते सुनाई जाती हैं ,बंजर रेत के समंदर की ;

कौन जाने , उस सूखे में..

कुछ दरख्तों ने खातिर रेत के जीना सीख लिया ।


रोशन हो जाता है जहाँ शमा सारा ;

पता नहीं तुम्हे , कुछ यू की..

खातिर मोहब्बत के परवाने ने जलना सीख लिया ।


छोड़ कर उसे जाना मुमकिन ना हुआ तो ;

तेवर से वाकिफ है सभी उसके..

खातिर खुशबुओं के कांटो ने गुलाब संग जीना सीख लिया ।


मेरी आदतों में भी बेशुमार था वो ;

देख आज बिन साँसों के जीना सीख लिया ।

वो रहता है , मुझमे , मुझसे भी गहरा , 

देख खातिर उसकी खुद पे पर्दा कर लिया ।



द इनसाइडर ©

Bin raaja ke ek kahani !

​                        कैसी ये कहानी है ;

                      बिन राजा के रानी है !

                      उतरे जब ख्वाबो से ,

                  बिन बारिशो के ही पानी है !

   

                 ख़त्म उसके नाम पे जवानी है ;

                   खातिर उसके ज़िन्दगानी है !

               निकले सफर पर खातिर तेरे जब ;

             ना मिले गर तू , ज़िन्दगी ये गवानी है !


                       कैसी ये कहानी है ;

                     बिन राजा के रानी है !

                   अधूरी नींदे कितनी सारी ;

                   अकेले सो कर बितानी है ;


            हर शख्श के होठो पर अपनी कहानी है ;

                 जाने कितनी बाते छिपानी है !

             कैसे जी गया ये वक़्त अपने दरमियां ;

           मिल के बिखरे दिल की दास्ताँ सुनानी है ।

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                       द इनसाइडर ©

                       कुलदीप चौधरी 

Yaad wo Fir Aa Gaya !

​हिसाब कितने दिनों का ; इन दिनों में कैसे लिखा गया ;

पढ़ कर तारीखे , नशा कुछ शराब सा मेरी आँखों में आ गया !


दे दो कुछ जाम मेरे हाथों में ;

उतर कर उसकी आँखों में , सुकून को सुकून सा कुछ आ गया !


मैं तारीफे करता रहा उसकी ;

कर के नफरत आज , किस्सा वो पुराना याद आ गया !


देखा एक दिन ; उस दिन ; उसे किसी और के साथ ;

उतर कर रगों से ; मेरा ही खून , मेरी ही आँखों में आ गया !


यूँ पलट कर उसका ; अभी भी देखना मुझे ;

एक किस्सा हीर रांझे का , आज फिर याद आ गया !


क्या करता उस दिन ; जब सामने आ गया वो ;

दिल टूट कर मेरे पैरों में , कुछ शराब सी बोतल सा आ गया !


देर क्या लगती बिखरने में फिर ;

मयखाने का पत्ता कुछ इस तरह फिर याद आ गया !


लिखा तो किसी दिन गया ही नहीं ;

किस्सा वो बेवफाई का , आज फिर याद आ गया !




The Insider ©

Kuldeep choudhary

Kuldeepjat341990.wordpress.com